नल दमयंती की प्रेम कथा

नल दमयंती की प्रेम कथा

जब युधिष्ठिर कौरवों के साथ जुए में अपना सब कुछ हारकर अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ वनवास का समय काट रहे थे, तब एक दिन ऋषि बृहदश्व वहाँ पधारे। युधिष्ठिर ने ऋषि का यथोचित सत्कार करने के बाद उनसे कहा,"महाराज! मुझसे ज्यादा अभागा कौन होगा इस संसार में जिसने अपना सब कुछ जुए में गवाँ दिया और अब यहाँ अपने परिवार के साथ वन में भटक रहा है।" इस पर महर्षि बृहदश्व ने कहा,"धर्मराज! ऐसा नहीं है। मैं आपको राजा नल कि कहानी सुनाता हूँ।"  

महर्षि बृहदश्व ने युधिष्ठिर को राजा नल और दमयन्ती के प्रेम और वियोग की जो गाथा सुनाई वही गाथा यहाँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

नल दमयन्ती की गाथा का अंतिम भाग

नल दमयन्ती की गाथा का अंतिम भाग

नल-दमयन्ती की कथा के छठे और अंतिम भाग में देखिये कैसे हुआ नल और दमयन्ती का पुनर्मिलन और कैसे बीता उनका बचा हुआ जीवन।

नल दमयन्ती की गाथा का पंचम भाग

नल दमयन्ती की गाथा का पंचम भाग

कथा के पाँचवे भाग में हम देखेंगे कि दमयन्ती ने राजा नल को ढूंढने के लिए क्या उपाय किये।

नल दमयन्ती की गाथा का चौथा भाग

नल दमयन्ती की गाथा का चौथा भाग

नल दमयन्ती की कथा के चौथे भाग में देखिये दमयंती को छोड़ देने के बाद राजा नल के साथ क्या-क्या हुआ।

नल दमयन्ती की गाथा का तीसरा भाग

नल दमयन्ती की गाथा का तीसरा भाग

नल और दमयन्ती की प्रेम कथा के तीसरे भाग में देखिये कैसे नल ने दमयन्ती को छोड़कर जाने का निर्णय लिया? उसके बाद दमयन्ती पर क्या बीती?

नल दमयन्ती की गाथा का दूसरा भाग

नल दमयन्ती की गाथा का दूसरा भाग

नल-दमयन्ती की गाथा के दूसरे भाग में देखिये, कलियुग ने कैसे दोनों के सुखी जीवन में भंग डाला?

नल दमयन्ती की गाथा का पहला भाग

नल दमयन्ती की गाथा का पहला भाग

राजा नल और दमयन्ती की अमर गाथा के पहले भाग में देखिये कैसे हुआ नल और दमयन्ती का मिलन।